
श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनसंघर्ष
चौरीचौरा से बनारस तक की ऐतिहासिक यात्रा
चौरीचौरा
17 जनवरी 2026
पूर्णदेवरिया
18-23 जनवरी 2026
यात्रा जारीबलिया
24-31 जनवरी 2026
आगामीमऊ
1-7 फ़रवरी 2026
आगामीगाजीपुर
8-12 फ़रवरी 2026
आगामीबनारस
12-17 फ़रवरी 2026
आगामीयात्रा की दैनिक जानकारी
युवाओं की मनरेगा बचाओ यात्रा का हुआ स्वागत, सपा - कांग्रेस ने भी किया समर्थन
ऐतिहासिक चौरीचौरा से यात्रा का शुभारंभ। स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि।
ग्रामीण भारत की रीढ़ रहे मनरेगा को वर्तमान सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से कमजोर कर दिया है। मनरेगा केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि यह कानूनी अधिकार था। काम का अधिकार, सम्मानजनक मजदूरी का अधिकार और ग्रामीण गरीबों के आत्मसम्मान का अधिकार।
मनरेगा केवल योजना नहीं, कानूनी अधिकार है
काम, मजदूरी और गरिमा की गारंटी
यह अधिकार अब छीना जा रहा है
मनरेगा की मजदूरी व्यवस्था में बदलाव का सीधा असर मजदूरों पर
100% मजदूरी केंद्र सरकार
पूर्ण वित्तीय जिम्मेदारी केंद्र की
मजदूरी की पूरी गारंटी
समय पर भुगतान सुनिश्चित
60% केंद्र + 40% राज्य
विभाजित जिम्मेदारी
मजदूरी अनिश्चित
राज्यों पर निर्भरता बढ़ी
₹261
प्रतिदिन मजदूरी
अनिश्चित भुगतान
3 करोड़
परिवार प्रभावित
योजना से बाहर
40%
राज्य का हिस्सा
नई व्यवस्था में
मनरेगा को वापस संवैधानिक अधिकार के रूप में स्थापित किया जाए
60-40 के विभाजन को समाप्त कर पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए
मौजूदा ₹261 से बढ़ाकर ₹400 प्रतिदिन सुनिश्चित की जाए
"यह संघर्ष सिर्फ मजदूरी का नहीं, गरिमा और अधिकार का है"
मनरेगा की हालत को दर्शाते हैं ये आंकड़े
मनरेगा ग्रामीण भारत की रीढ़ है। इस अभियान का हिस्सा बनें और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करें।
यात्रा में शामिल हों
यात्रा को समर्थन दें
जागरूकता बढ़ाएं